“माँ” मैक्सिम गोर्की का विश्वप्रसिद्ध क्रांतिकारी उपन्यास है, जो एक साधारण माँ की असाधारण जागृति और साहस की कहानी कहता है। रूसी सामाजिक और राजनीतिक उथल-पुथल की पृष्ठभूमि में लिखा गया यह उपन्यास शोषण, अन्याय और क्रांति की भावना को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।
कहानी की नायिका पेलागेया निलोवना एक डरपोक और अत्याचार सहने वाली स्त्री के रूप में शुरू होती है। लेकिन अपने बेटे और उसके क्रांतिकारी साथियों के संपर्क में आने के बाद वह धीरे-धीरे अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली मजबूत व्यक्तित्व में बदल जाती है।
गोर्की की लेखनी यथार्थवादी और भावनात्मक है। वे मजदूर वर्ग की पीड़ा, उनके संघर्ष और बेहतर समाज की उम्मीद को गहराई से चित्रित करते हैं। “माँ” केवल एक पारिवारिक कथा नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और परिवर्तन की गाथा है।
यह उपन्यास आज भी प्रेरणादायक है, क्योंकि यह दिखाता है कि साधारण इंसान भी असाधारण परिवर्तन का हिस्सा बन सकता है।
Publisher: RADUGA PRAKSHAN MOSCOW
Language : HINDI
Binding: PAPER BACK
Pages : 444

