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“स्मृति की गलियारों से” में लेखक ने अपने जीवन के विविध अनुभवों, संबंधों, घटनाओं और भावनात्मक पड़ावों को अत्यंत सरल और प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत किया है। पुस्तक का मूल भाव यह है कि स्मृतियाँ केवल बीता हुआ समय नहीं होतीं, बल्कि वे वर्तमान को दिशा देने वाली चेतना भी होती हैं।

लेखक जीवन के छोटे-छोटे प्रसंगों, पारिवारिक रिश्तों, सामाजिक परिवेश और मानवीय संवेदनाओं को बड़ी आत्मीयता से चित्रित करते हैं। कहीं बचपन की निश्छलता है, कहीं समय के साथ आए बदलावों की टीस, तो कहीं रिश्तों की ऊष्मा और बिछड़ने का दर्द।

यह पुस्तक पाठक को अपने जीवन की स्मृतियों से जोड़ती है और आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है। लेखक की शैली सहज, मार्मिक और आत्मीय है, जिससे पाठक स्वयं को कथा का हिस्सा महसूस करता है।


प्रमुख विषय

  • स्मृतियाँ और आत्मचिंतन

  • बचपन और पारिवारिक संबंध

  • समय और परिवर्तन

  • जीवन के अनुभव

  • भावनात्मक संवेदनाएँ


प्रमुख विशेषताएँ

  • सरल और भावपूर्ण हिन्दी भाषा

  • संस्मरणात्मक शैली

  • आत्मीय और चिंतनशील प्रस्तुति

  • जीवन मूल्यों पर प्रकाश

  • सभी आयु वर्ग के पाठकों के लिए उपयुक्त


“स्मृति की गलियारों से” – अजय एक ऐसी पुस्तक है जो पाठकों को अपने अतीत से जोड़ते हुए वर्तमान को अधिक संवेदनशील और अर्थपूर्ण बनाने की प्रेरणा देती है। 📖✨

PUBLISHER: PRABHAT PRAKASHAN

BINDING: HARD COVER

LANGUAGE: ENGLISH

PAGES: 76